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चेहरे चर्चित चार, समाजसेवी - चिकित्सक - व्यापारी और छायाकार....

आदरणीय पाठक बंधु
सादर अभिवादन स्वीकार हो।
हम आपके लिए एक ऐसा धारावाहिक लेख प्रस्तुत कर रहे है, जिसमे चार ऐसे लोंगो की जानकारी विशेष है , जिन्होंने विभिन्न अलग अलग क्षेत्रो पर बहुत अच्छा कार्य करके लोंगो का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया है, जैसा कि आप हेडिंग से उन कार्यक्षेत्रों के बारे में समझ गए होंगे।
मेरी पूरी कोशिश होगी कि उन लोंगो के जीवन के कुछ रोचक, सुखद, और संघर्ष के बारे में जानकारी इकट्ठा करके लिख सकूं, और सहज शब्दो के माध्यम से उस भाव को आपके सामने प्रकट कर सकूं, जिससे आप किसी भी घटना क्रम को पूर्ण रूप से सही समर्थन दे सकें।
आपका
सचीन्द्र मिश्र
सीधी

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📱 चेहरे चर्चित चार📱
समाजसेवी - चिकित्सक - व्यापारी और छायाकार....


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✍️ आशीष मिश्र📱
समाजसेवी
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चर्चित चेहरे चार में आज के हमारे मेहमान हैं जिले के शिक्षा जगत से जुड़े समाजसेवी आशीष मिश्र एक ऐसा नाम है जिन्होंने कई क्षेत्रों में अनुभव अर्जित किया है । आशीष मिश्र का जन्म 10 जनवरी 1975 को जिले के सिहावल तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गेरुआ में हुआ , आपकी पारिवारिक पृष्ठ भूमि भी काफी सुदृढ़ रही है आपके दादा शिवशंकर मिश्र रिटायर्ड ADM सिंगरौली है जो सीधी जिले के प्रथम ग्रेजुएट भी रहे है, आपके पिता स्वर्गीय श्री आशुतोष मिश्रा जिले के वरिष्ठ समाज सेवी और वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं ।
आप प्राथमिक शिक्षा से लेकर 10 वी तक की शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर में अर्जित किया है । तत्पश्चात मॉडल हाई स्कूल जबलपुर में कक्षा 11 से 12 इसके पश्चात BE मैकेनिकल गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज बिलासपुर फिर 1998 में पढ़ाई कंप्लीट करने के पश्चात प्रथम नौकरी 1998 से लेकर 2001 तक महेश्वर पावर प्रोजेक्ट में कार्य किया 2002 से लेकर 2005 तक ओरियंट पेपर मिल तत्पश्चात रिलायंस कम्युनिकेशन के बतौर सीनियर इंजीनियर कार्य किए । तत्पश्चात 2006 से 2012 तक सीधी मेंटेनेंस पॉइंट में क्रमशः सीधी रीवा एवं सिंगरौली जिलों की नेटवर्क ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस का कार्यभार 2012 तक किया इसके पश्चात 2013 से लेकर 2014 तक टाटा टेली कम्युनिकेशन के बतौर क्लस्टर हेड रीवा संभाग कार्य क किया गया । आप 2015 से लेकर वर्तमान समय में Reliance jio के बतौर DGM मेंटेनेंस के पद पर टेलीकॉम नेटवर्क ऑपरेशन हेड मेंटेनेंस कार्य किया जा रहा है ।


शुरू से ही पारिवारिक सामाजिक दृष्टिकोण होने के कारण समय-समय पर पीड़ित मानवता के प्रति आप हमेशा संवेदनशील रहे हैं स्वंम के पास उपलब्ध आवश्यक सुविधाओं को जरूरतमंद लोगों की मदद करने में अग्रसर रहे हैं । 2020 में आपने साईं महाविद्यालय परिसर में तत्कालीन कलेक्टर रवींद्र चौधरी की उपस्थिति में रिकॉर्ड 52 यूनिट रक्तदान कराया गया , तत्पश्चात कोविड महामारी के दौरान कोविड हेल्पलाइन ग्रुप बनाकर कोविड मरीजों के संबंधी आवश्यक सूचनाएं संबंधित मरीजों की स्वास्थ्य सुधार हेतु प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर आवश्यक सुविधायें मुहैया कराई गई । इसी बीच अस्पताल परिसर में रक्त शिविर लगाकर रक्तदान किया गया 500 से अधिक गरीब बस्ती परिवारों में कोविड से संबंधित दवाइयां मास्क सेनिटाइजर वितरित किया गया लॉकडाउन के दौरान लगातार एक महीने तक दीनदयाल भोजनालय में गरीब एवं मरीजों के परिजनों को भोजन की व्यवस्था कराई गई तत्पश्चात सीधी के समस्त सफाई कर्मियों का सम्मान एवं सहभोज तत्कालिक एसडीएम की मौजूदगी में सह भोज कराया गया ।


वर्तमान समय में 250 से अधिक लोगों का ब्लड ग्रुप डाटाबेस बनाकर आवश्यकतानुसार रक्त प्रदान करने का वीणा उठाया गया है । पिछले वर्ष अगस्त 2021 से आप राष्ट्रीय सामाजिक संस्था भारत विकास परिषद के अध्यक्ष का दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। भारत विकास परिषद् राष्ट्रीय हित के सिद्धांतों एवं स्वामी विवेकानंद के आदर्शों के परिपालन एवं पीड़ित मानवता के सहायतार्थ एक अशासकीय राष्ट्रीय संस्था है जिसके मार्फत दीनहीन की सेवा के प्रति आशीष कृत संकल्पित हैं । यह वही आषीष हैं जिनके पिताश्री आशुतोष जिनका वकालत क्षेत्र में एक वड़ा नाम था , उस दौर के लोग आज भी स्वर्गीय आशुतोष के नाम और काम से वाकिफ हैं .... पिता के पदचिन्हों और खुद की मेहनत का परिणाम है कि आशीष ने शिक्षा जगत में भी अपना नाम कमाया है , आपके संरक्षण में आपकी धर्म पत्नी द्वारा कम्यूटर कालेज का संचालन किया जा रहा है जिसके मार्फत सैकड़ों छात्र छात्राओं ने सीधी का नाम रोशन किया है । कर्म क्षेत्र के साथ साथ आशीष समाजसेवा के रास्ते पर चल पड़े हैं पूर्वजों के अधूरे सपनों को साकार करने के लिये आये दिन कोई न कोई सामाजिक गतिविधियों में उनकी स्पष्ट सहभागिता दृष्टिगोचर हो रही है । भविष्य जैसा भी हो लेकिन आशीष अपने पैत्रिक क्षेत्र सिहावल को अपना मंदिर मानते हैं ... अगर यूं कंहें कि मंजिल भी यहीं हैं तो अतिशयोक्ति नही होगा सिर्फ इंतजार है तो वक्त का....


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✍️ डॉक्टर लक्ष्मण पटेल📱
नेत्र चिकित्सक

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चेहरे चर्चित चार के आज इस अंक में चिकित्सा क्षेत्र से बात करेंगें डॉक्टर कि जिनके बारे में करीब-करीब जिले के हर एक व्यक्ति से इनकी पहचान है, सरल सहज बघेली भाषा में लोगों को समझा देना व उनको इलाज मुहैया कराना इनकी खासियत है । संक्षिप्त में अगर कहे तो जिले भर के गरीब आंखों का अंधकार दूर करने का बीड़ा इन्होंने उठाया है जी हां हम बात कर रहे हैं जिला चिकित्सालय में पदस्थ नेत्र चिकित्सक डॉक्टर लक्ष्मण पटेल की .....डॉ लक्ष्मण पटेल एक ऐसा नाम है जिन्होंने बेहद कम समय में जिले में अपनी अलग पहचान बनाई है और सैकड़ों नेत्र रोगियों की आंखों की रोशनी बचाई है।

लक्ष्मण पटेल का जन्म पड़ोसी जिले रीवा के नईगढ़ी क्षेत्र अंतर्गत पिपरा ग्राम में एक किसान परिवार में हुआ इनकी प्राथमिक शिक्षा ग्राम पिपरा में ही संपन्न हुई इसके बाद हाई स्कूल मार्तंड क्रमांक 1 रीवा से तथा एमबीबीएस कि पढ़ाई श्यामा शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा से पूर्ण हुई। इन्होंने नेत्र चिकित्सा में पीजी की डिग्री इंदौर से प्राप्त करने के बाद फैलोशिप के लिए यह वीर नगर राजकोट गुजरात एवं चित्रकूट गए जहां से पीजी करने के उपरांत इन्होंने बतौर नेत्र चिकित्सक पहली बार विदिशा मैं सेवा दी। आप 2016 में सीधी आ गए और तब से सीधी जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इन्होंने जिले में करीब 5000 रोगियों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन और करीब 1000 माइनर ऑपरेशन किए इसके साथ ही अभी भी जिले में लगातार रूटीन ऑपरेशन इनके द्वारा किए जा रहे हैं।

डॉ लक्ष्मण पटेल द्वारा बेहद ही सरल और सहज रूप से मरीजों को सलाह वह एहतियात बरतने की समझाइश दी जाती है।आंखों कि सभी तरह की समस्याओं का समाधान इनके द्वारा किया जाता रहा है जिले में लगने वाले शिविरों के माध्यम से भी रोगियों को चिन्हित कर इनके द्वारा जिला चिकित्सालय में ऑपरेशन किए जाते हैं ज्ञात हो कि नेत्र रोगियों को उनके द्वारा लगातार लोगों को जिले में ही उचित इलाज की सुविधा दी जा रही है इनके नेतृत्व में जिले के लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने की कवायद निरंतर जारी है। विंध्य क्षेत्र की परम्परा गत जातिवाद की हवाएं कंही न कंहीं हर क्षेत्र में सफलता पर वाधक वनती है , हलाकि गरीब तवके के मरीजों की डॉक्टर लक्ष्मण आज धड़कन वन चुके हैं , सीधी की दूषित हबा से अपने आपको वह इस वयार से कितना अलग कर पायेंगें यह तो कह पाना मुश्किल है किंतु आज वह एक अच्छे चिकित्सक हैं यह कहना अतिश्योक्ति नही होगा ।


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✍️ बशंतलाल गुप्ता📱
होटल व्यावसाई

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चर्चित चेहरे में आज के हमारे मेहमान है चुरहट क्षेत्र के सफल व्यवसायी एक समाज सेवी और राजनीती से जुड़े व्यक्तित्व के धनी बसंत लाल गुप्ता ..... जी हाँ बेहद सरल सहज और सौम्य व्यक्ति बसंतलाल गुप्ता का जन्म, 10 जुलाई 1974 को चुरहट में हुआ इनकी प्रारम्भिक शिक्षा प्राथमिक पाठशाला चुरहट में 1 से 5 तक, बालक हायर सेकंडरी चुरहट से 6 से 12 हुई इसके बाद इन्होने भोजमुक्त विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हांसिल की है ।

चुरहट में आपके पिता जी द्वारा चलाये जा रहे पारम्परिक व्यवसाय को आपने अपनाया , वर्तमान में बसंत स्वीट के नाम से संचालित आपके प्रतिष्ठान की बात करे तो पूर्व से ही यह गुप्ता होटल के नाम से काफी प्रसिद्ध रहा है, और यहां के समोसे और लौंगलता बेहद प्रसिद्ध हुआ करती थी, आपके द्वारा अपने पिता जी के व्यवसाय को आगे बढ़ाते हुए उसमे और वृद्धि कि गयी और आज के आधुनिक परिवेश में उसे ढाला गया, इसके अतिरिक्त अपने व्यवसाय को समाज में और आगे बढ़ाते हुए आपने कई अन्य प्रतिष्ठानों की स्थापना कर समाज में नाम रोशन किया है ।


पढाई के बाद राजनीतिक परिवेश में पले बढे होने के कारण इनकी रूचि राजनीती में बढी जिसके बाद इन्होने तत्कालीन पंचायत मंत्री व कांग्रेस के कद्दावर नेता अजय सिंह से कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की, कांग्रेस में रहते हुए आप अजय सिंह राहुल भैया के विधायक प्रतिनिधि रहे,साथ ही शासकीय महाविद्यालय चुरहट में जनभागीदारी समिति के सदस्य भी रहे है इतना ही नहीं लोकसभा युवा कांग्रेस के सदस्य भी रह चुके है । और समय समय पर कांग्रेस पार्टी में होने वाले कार्यक्रमों में आपकी सहभागिता चुरहट खासतौर से अपने आका के लिये उल्लेखनीय रहती है ।
तत्कालीन नगर पंचायत के गठन के बाद द्वितीय पंचवर्षीय 2003 में आपने अपनी पत्नी संगीता गुप्ता को अध्यक्ष पद हेतु उम्मीदवारी दर्ज कराई थी किंतु महज कुछ वोटो से वह पीछे रह गयी थी ।


चुरहट क्षेत्र में एक सफल व्यवसायी के साथ ही आप एक आच्छे समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते है, क्षेत्र में आपकी छवि अच्छे और ईमानदार व्यापारी और समाज सेवी के रूप में है । वर्तमान में भी आप अपने क्षेत्र के लिए सक्रिय रूप से सेवाभाव से समर्पित रहते हैं, इतना जरूर है कि आज उन्हे जिस मंजिल की तलास है वह अब तक नसीव नही हुई है । किंतु निकाय की राजनीति में वह सहभागिता अदा करने में आमादा हैं । पर इच्छापूर्ति कब होगी ...आका जानें ...?



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✍️ महेन्द्र सर्राफ📱
छायाकार

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चर्चित चेहरे में आज हम बात करेंगें जिले के एक ऐसे चर्चित सख्स की जिसे शायद ही कोई न जानता हो,एक समय था जब जिले भर के मीडियाकर्मियों व प्रशासन के लिए ये एक महत्वपूर्ण साधन थे गैर इनकी छायाकंन सब अधूरा हुआ करता था । शासकीय कार्यक्रमों में इनकी उपस्थिति अनिवार्य हुआ करती थी कारण की वह समय डिजिटल नही था ... जी हा हम बात कर रहे है जिले के गोल्डन फोटो स्टूडियो के संचालक और प्रेस फोटोग्राफर महेंद्र सर्राफ की ....महेंद्र सरार्फ का जन्म 25 जुलाई 19 72 को सीधी जिले में हुआ इनकी प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा सीधी जिले में ही हुई बीए तक की पढ़ाई करने के बाद इन्होने 20 साल की उम्र में अपने हाथो में कैमरा थाम लिया और छायाकार के रूप में अपनी अच्छी पहचान बनाई । सीधी से प्रकाशित स्थानीय दैनिक समय अखबार में प्रेस फोटोग्राफर का दायित्व अदा करते हुये पत्रकारिता के क्षेत्र में जुनून चढ़ता चला गया और फिर जिले के हर अखबारों में अपनी छायाकार की कला से परछाईं वनकर उभरे ।

महेन्द्र सर्राफ वताते हैं कि वह दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक नवभारत, दैनिक समय, दैनिक नव स्वदेश, राज एक्सप्रेस, कीर्ति प्रभा, कीर्ति क्रांति आदि कई अखबारों के लिये प्रेस फोटोग्राफर का कार्य कर चुके हैं । महेन्द्र एक घटना का जिक्र करते हुए बताते है कि- जिंदगी की पहली घटना 1989 में उस समय घटी जब समय कार्यालय में अतिक्रमण के ऑड़ पर प्रशासन के द्वारा अपनी खीज उतारी जा रही थी । अतिक्रमण मुहिम को अपने कैमरे में कैद कर रहे थे तब आपका कैमरा जप्त कर लिया गया और सबूत को नष्ट करते हुए रील को निकाल लिया गया , और कैमरा खाली वापस पकड़ा दिया गया। हलाकि जिले के पत्रकारों के आगे प्रशासन कि गुंडागर्दी नाकाम रही है , उस दौर में प्रेस के लिये फोटोग्राफी बहुत बड़ी चुनौती रहती थी उस जमाने में अगर रील धुलाई में या की कैमरा का ढक्कन खोलने पर सारी मेहनत खराब हो जाती। बहुत ही सावधानी बरतते हुए कार्य किया जाता था। और यह इन सब बारीकियों को सहजता से समझते हुये सफलतापूर्वक छायाकार का रोल अदा करते थे ।

महेन्द्र सर्राफ बताते है कि पीएम एवं सीएम के प्रोग्राम में जिले के बाहर के भी फोटोग्राफर आया करते थे । उन सभी फोटोग्राफरों का मुकाबला करना अपनी फोटो छपने चाहिए ऐसी चुनिंदा फोटो खींचकर भेजते थे ताकि फोटो को जगह मिले छायाकार का नाम छपे उस दौर में यह एक बड़ी प्रतिस्पर्धा थी । आज के समय में तो घर-घर में फोटोग्राफर है, पत्रकार है ,ऐसी तकनीकी आ चुकी है कि मोबाइल से सारा कार्य हो रहा है। श्रमजीवी पत्रकार संघ सम्मेलन उमरिया में संपन्न हुआ जहां पहली बार भाग लेने का अवसर पदमधर पति त्रिपाठी जी एवं के साथ प्राप्त हुआ। फोटो छायाकार की फोटो ही एक समाचार हुआ करती थी । फोटो बोलती थी कैप्सन के आधार पर अखवारों में खबर छपती थी । पत्रकार सम्मेलन 2004 सीधी जिले में आयोजित हुआ उस समय महेन्द्र को श्रमजीवी पत्रकार संघ युवा प्रकोष्ठ का जिला अध्यक्ष वनाया गया था , प्रशासनिक पैठ अच्छी होने के साथ साथ फोटोग्राफी का कार्य जनसंपर्क विभाग , जिला पंचायत, जनपद पंचायत, जल संसाधन विभाग , नगर पालिका परिषद ,स्वास्थ विभाग ,सहकारी बैंक आदि कई संस्थानों में उच्च कोटि की फोटोग्राफी के लिए जाने जाते थे । महेन्द्र की माने तो समय-समय पर वरिष्ठ पत्रकारों में पद्म धार पति त्रिपाठी, विजय सिंह ,बृजेश पाठक ,आरबी सिंह , सचीन्द्र मिश्र , आदित्य सिंह, मनोज पाण्डेय का मार्गदर्शन वतौर छायाकार उल्लेखनीय रहा है ।

सतना निवासी पत्रकार साथी देवेंद्र सिंह परिहार के साथ काम करने के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ रक्तदान जैसे महादान करने प्रेरणा
मिली और जिला चिकित्सालय में रक्तदान करने का अवसर प्राप्त हुआ, इसके बाद कई बार रक्तदान भी दिया गया । जिले में बढ़ते पत्रकारों की संख्या और वर्तमान में आई शोशल मिडिया डिजिटल मोबाइल क्रांति ने बेशक इन पुराने और अनुभवी फोटोग्राफरों के कार्य को मात दिया है । लेकिन इनके द्वारा अतीत में किये गए कार्य बेहद सराहनीय और उपयोगी रहे है सीमित संसाधनों में लोगो तक जानकारी पहुचाने और प्रेस के सहयोग के लिए ऐसे लोगो को हमेशा याद किया जायेगा । छायाकार महेन्द्र सर्राफ की सराफत भी उस दौर में बड़ी नटखट थी काफी अनसुनी कहांनियों का राज इनकी छायाकंन में छुपा है । जो नही छपा और भविष्य में छपेगा भी नही ....😀

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